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Poetry written by Mr Rustamdeen Panwar

Posted by Sadik Khan Panwar on June 19, 2014 at 10:55 AM

Poetry written by Mr Rustamdeen Panwar

s\o Late Ramzan Khan Panwar

दिल का राजा रहा ,बादशाह और प्रिन्स कहलाया .

खानदान पंवार मैं उसने ,जन्म जमीन पर पाया.

जैसे हो गुलाब खार मैं ,वो भी यों मुस्काये .

खाकी वर्दी पहन के वो, पुलिस में फिर भी छाये .

यों इक़बाल हुसैन पंवार को देखो ,रूप चाँद सा पाया .

दिल का राजा रहा ,बादशाह और प्रिन्स कहलाया.

हेरेडीटी का असर रहा.सदीक पंवार मैं वैसा .

रुस्तमजी पंवार ने देखो,लिख दिया वैसा का वैसा .

फ़िल्मी हीरो जैसी उनकी,लगती थी वैसी काया .

दिल का राजा रहा ,बादशाह और प्रिन्स कहलाया.

ठाट बात से जीवन बिता ,न मायूसी छायी .

चारों और हमेशा उनके ,रोज़ बहारें आई .

बीकानेर मैं नाम का अपने,यों डंका पिटवाया(बजवाया).

दिल का राजा रहा ,बादशाह और प्रिन्स कहलाया.

दुआ करूँ अल्लाह से हरदम,एक मर्द दे ऐसा .

खानदान पंवार का करदे,नाम भी रोशन वैसा .

सुबह शाम और रात को मैंने ,तेरा ही ध्यान लगाया .

दिल का राजा रहा ,बादशाह और प्रिन्स कहलाया.

ऐसे वीर बहादुर सारी वसुंधरा पर छाये .

खानदान पंवार हो पथ मैं ,देख धरा मुस्काये .

दिल का राजा रहा ,बादशाह और प्रिन्स कहलाया.

A lot of thanks to Mr Rustamdeen Panwar for writing this poetry to appreciate my father late iqbal Hussain Panwar

Adapted by - Sadik Khan Panwar

Categories: Poets

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